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जिस उम्र में बच्चे सपनों की दुनियाँ में खोये रहते हैं, वहीं यह बच्चा दुनिया का सबसे छोटा सीईओ बन गया है। छोटी उम्र के रुबेन पॉल “प्रूडेंट गेम्स” के फाउंडर हैं। यह साइबर सिक्योरिटी के बारे में उनकी एप्लीकेशन डेवलपिंग फर्म है। रुबेन ने यह कंपनी 2014 में शुरू की और आज वे बहुत सारे गेम्स डिज़ाइन और डेवेलप कर रहे हैं।

भारतीय मूल का यह बच्चा अमेरिका में रहता है। रुबेन जब बोलते हैं तो बड़े से बड़े ध्यान से सुनते रह जाते हैं। अधिकतर ये बड़े-बड़े कॉन्फरेंसेस में साइबर सिक्योरिटी के बारे में बताते हैं। इन्होंने सिक्योरिटी कांग्रेस में भी हिस्सा लिया था और साल 2014 में हुए हॉस्टन सिक्योरिटी कांफ्रेंस के समापन वक्ता के रूप शरीक हुए। 

रुबेन के पिता मानो पॉल भी एक डेवलपर और साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट हैं। मानो ने रुबेन को साइबर सिक्योरिटी के बारे में सीखाना शुरू किया और बाद में उन्हें इस क्षेत्र में बेहद रुची हो गई और वे खुद से ही सीखने शुरू कर दिए।

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जब वे दूसरी क्लास में थे तब उनके एक शिक्षक ने क्लास को एक लर्निंग गेम बनाने का प्रोजेक्ट दिया। सारे बच्चे जहाँ हाथ से बने बोर्ड गेम या कार्ड गेम बना कर लाए, वहीं रुबेन ने एक लर्निंग ऐप ही बना डाला। जिसका नाम उन्होंने ‘शुरिकेन मैथ’ रखा जो बच्चों को गणित सीखने में मदद करता है। इस काम के लिए पूरे स्कूल में उन्हें प्रशंसा मिली। उसके बाद अपने माता-पिता के सहयोग से उन्होंने प्रूडेंट गेम्स नाम की कंपनी खोलने का निश्चय किया। यह कंपनी शिक्षा से संबंधित गेम्स और ऐप बनाता है।

रुबेन की इस विशेषता के बारे में जब डाइरेक्टर हार्ड टिप्टन को पता चली तो उन्होंने उन्हें साइबर सिक्योरिटी के बारे में काम करने को कहा। रुबेन ने अपना पहला साइबर सिक्योरिटी ऐप भी बना लिया है जिसका नाम क्रैकर प्रूफ है। यह बच्चों को मनोरंजक और एजुकेशनल तरीके से स्ट्रांग पासवर्ड बनाना सिखाता है। रुबेन यह सोचते हैं कि साइबर सिक्योरिटी के बारे में बच्चों को स्कूल में ही शिक्षा देनी चाहिए और यह उनके पाठ्यक्रम में शामिल किया जाना चाहिए। वे इस बात का भी उल्लेख करते हैं कि स्कूल को हैकर्स की धमकी से डरना नहीं चाहिए बल्कि विद्यार्थियों को खुद से एथिकल हैकिंग करने की छूट देनी चाहिए। यह इंटरनेट के भविष्य में बहुत जरुरी होने वाला है।

भारत में नौ वर्ष की उम्र के बच्चे टेक्स्टबुक पढ़ने में व्यस्त रहते हैं, जोड़-घटाव, गुणा -भाग सीखने में व्यस्त रहते हैं। जब उनकी उम्र कंप्यूटर सीखने की होती है तब बच्चों को स्कूल में यह अनुभव करने की छूट नहीं दी जाती, साइबर सिक्योरिटी के बारे में जानना तो दूर की बात होती है।

रुबेन बताते हैं कि अच्छी हैकिंग स्किल से आपके पास पावर आती है। पावर आने से आपको उसके लिए उत्तरदायी भी होना पड़ेगा। वे बताते हैं कि टेक्नोलॉजी के इस ज़माने में जहाँ साइबर बुलिंग और डाटा की चोरी आम बात है, इसलिए ये जरुरी है कि बच्चों को इसके बारे में जानकारी दी जाय जिससे वे खुद को शिकार होने से बचा सके। 

कुछ सालों बाद साइबर सिक्योरिटी का क्षेत्र विद्यार्थियों के लिए ढेर सारे अवसर देगा। आज के युग को पूरी तरीके से सॉफ्टवेयर और ऑटोमेशन ने अपने क्षत्रछाया में ले लिया है। आज भारत के बच्चों को माता-पिता और स्कूल सभी मिलकर उस स्तर का ज्ञान देने की कोशिश कर रहे हैं। केवल किताबी ज्ञान से बच्चों के दिमाग का विकास उस स्तर तक नहीं पहुंच पाता।

अल्बर्ट आइंस्टीन ने कहा है “ज्ञान से ज्यादा महत्वपूर्ण कल्पना होती है।” शिक्षा ज़रूरी तो है लेकिन अन्वेषण सर्वश्रेष्ठ है, खासकर अपने देश के युवा बच्चों के लिए।